Friday, 7 January 2022

gazal

हम तो है प्रदेश में, देश में निकला होगा चाँद 

अपनी छत पे कितना अकेला होगा चाँद 

 

जिन आँखों में काजल बन कर तैरी काली रात  हो 

उन आँखों में अंशु का एक कतरा होगा चाँद 

हम   

 

 रात ने ऐसा पेंच लगाया टूटी हाथ से डोर २  

आंगन वाले नीम में जा कर अटका होगा चाँद 

,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 

चाँद बिना हर दिन यूं बीता जैसे युग बीते 

मेरे बिना  किस हाल में होगा  कैसा होगा चाँद 

हम,,,,,,,

 

अपनी रात की छत पर कितन तनहा होगा चाँद 

         जगजीत सिंह के बोल

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ये  कैसा सफर चल रहा है  कि तेरे इश्क़ का दीया, मुझ में अब तक जल रहा है।