ये कैसा सफर चल रहा है
कि तेरे इश्क़ का दीया,
मुझ में अब तक जल रहा है।
ये कैसा सफर चल रहा है कि तेरे इश्क़ का दीया, मुझ में अब तक जल रहा है।
No comments:
Post a Comment